नई दिल्ली: ज्योतिष शास्त्र में मोती को चंद्रमा का रत्न माना जाता है। मान्यता है कि यह मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और आत्मविश्वास बढ़ाने में सहायक होता है। हालांकि, ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मोती हर व्यक्ति के लिए शुभ नहीं माना जाता। इसलिए इसे धारण करने से पहले कुंडली और ग्रहों की स्थिति का आकलन जरूरी बताया गया है।
चंद्रमा का प्रतिनिधि रत्न है मोती
ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा मन, भावनाओं और मानसिक स्थिति का कारक ग्रह है। जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर होता है, उनके लिए मोती लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि इसे धारण करने से मानसिक स्थिरता और सकारात्मक सोच में वृद्धि हो सकती है।
इन राशियों को बिना सलाह नहीं पहनना चाहिए मोती
ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक, जिन लोगों की कुंडली में शुक्र, बुध या शनि का प्रभाव अधिक होता है, उनके लिए मोती उपयुक्त नहीं माना जाता। खासतौर पर वृषभ, मिथुन, कन्या, मकर और कुंभ राशि या लग्न के जातकों को विशेषज्ञ की सलाह के बिना मोती धारण नहीं करना चाहिए। ग्रहों की स्थिति, दशा और योग का विश्लेषण करने के बाद ही रत्न पहनने की सलाह दी जाती है।
इन रत्नों के साथ नहीं करना चाहिए संयोजन
ज्योतिष में मोती के साथ कुछ रत्नों का संयोजन उचित नहीं माना गया है। मान्यता के अनुसार इसे हीरा, पन्ना, नीलम और गोमेद के साथ पहनने से बचना चाहिए। वहीं पुखराज और मूंगा के साथ मोती का संयोजन शुभ माना जाता है और इससे सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना बताई गई है।
इन राशियों के लिए शुभ माना जाता है मोती
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मेष, कर्क, वृश्चिक और मीन राशि या लग्न के जातकों के लिए मोती शुभ माना गया है। इसके अलावा सिंह, तुला और धनु लग्न के लोग भी विशेष परिस्थितियों में इसे धारण कर सकते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय कुंडली के विस्तृत विश्लेषण के बाद ही लेना चाहिए।
नोट: यह जानकारी ज्योतिषीय मान्यताओं और पारंपरिक विश्वासों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य सूचना देना है।
